सतपुड़ा की विशाल गिलहरी का रास्ता ऊपर है: ऊँची शाखाओं और एक-दूसरे से जुड़ी पेड़ों की छतरी में। उसकी लंबी पूँछ और लाल-भूरा शरीर दूर से ध्यान खींचते हैं। लेकिन जंगल में वह कहाँ ज्यादा मिलती है, इसे जानने के लिए शोधकर्ताओं को नीचे जमीन पर लंबे, तय रास्ते बार-बार चलने पड़े। 2013 में प्रकाशित अध्ययन ने इसी तरह सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में उसके घनत्व की एक शुरुआती आधार-रेखा तैयार की।

दिसंबर 2011 से फरवरी 2012 के बीच टीम ने अलग-अलग वन प्रकारों में 39 स्थायी रास्ते चुने। सर्वे की भाषा में इन्हें ट्रांसेक्ट कहते हैं। सुबह छह से नौ बजे हर रास्ते पर तीन बार सर्वे किया गया; कुल पैदल प्रयास 276 किलोमीटर था। गिलहरियाँ 35 अवसरों पर दिखीं और 42 जीव दर्ज हुए। दर्शन की दूरी को शामिल करने वाली गणना से अध्ययन-क्षेत्र में करीब 5.6 गिलहरियाँ प्रति वर्ग किलोमीटर का अनुमान निकला।

चूरना के नालों के पास

सबसे अधिक दर्शन चूरना के नदी-नाला किनारे वाले जंगल, वॉच टावर क्षेत्र के नम और सूखे पर्णपाती वन तथा नीमघान से पचमढ़ी के अर्ध-सदाबहार हिस्से में हुए। अर्जुन, महुआ और सागौन के पेड़ों पर इसकी मौजूदगी दर्ज की गई। इन जगहों का विवरण अगली निगरानी के लिए काम आता है: सर्वे करने वाला दल जान सकता है कि किन वन प्रकारों और मौसमों में पहले खोज हुई थी।

पेड़ों पर रहने वाले जीव के लिए जंगल का टुकड़ों में बँटना एक चिंता है। शोधपत्र ने आवास के इस विखंडन को विशाल गिलहरी के लिए खतरा बताया। सतपुड़ा के आधिकारिक ईको-सेंसिटिव जोन दस्तावेज में भी इसे आवास-परिवर्तन के प्रति संवेदनशील जीवों में रखा गया है।

अगला सर्वे क्या बता सकता है

पुरानी घनत्व-संख्या को 2026 की आबादी मानना सही नहीं होगा। मौसम, वन प्रकार और देखने वाले व्यक्ति का अनुभव परिणाम पर असर डालते हैं। तुलनीय रास्तों और तरीके से दोबारा अध्ययन करने पर बदलाव समझा जा सकता है। विशाल गिलहरी का यह छोटा शोध पेड़ों की गिनती के साथ उनकी आपसी जुड़ावट पर भी ध्यान दिलाता है।

मुख्य बातें

  • 2011–12 के अध्ययन में 39 तय रास्तों पर कुल 276 किलोमीटर पैदल सर्वे हुआ।
  • 35 बार दिखीं कुल 42 गिलहरियों के आधार पर अध्ययन-क्षेत्र का घनत्व करीब 5.6 प्रति वर्ग किलोमीटर आँका गया।
  • नदी-नालों के किनारे के वनखंड अहम आवास निकले; यह ऐतिहासिक अध्ययन आज की गणना नहीं है।

स्रोत और संदर्भ

  1. Journal of Research in Biology · Population density of Indian giant squirrel Ratufa indica centralis (Ryley, 1913) in Satpura National Park, Madhya Pradesh, India ↗25 नवंबर 2013
  2. Satpura Tiger Reserve / Government of Madhya Pradesh · Preparation of Zonal Master Plans for Eco-Sensitive Zones: Satpura National Park and Pachmarhi & Bori Wildlife Sanctuary — Part 1 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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