ग्वालियर के गुजरी महल में रखी शालभंजिका की प्रतिमा विदिशा जिले के ग्यारसपुर से मिली थी।

लाल बलुआ पत्थर की इस रचना को राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन की सूची परमार शैली और आरंभिक मध्यकाल से जोड़ती है।

प्रतिमा की ऊंचाई 49.5 सेंटीमीटर है। उसके हाथ और पैरों के हिस्से टूट चुके हैं, लेकिन केश-सज्जा, गले के हार और कमर के वस्त्रों की नक्काशी बची हुई है। सिर के पीछे पेड़ का खंडित हिस्सा दिखाई देता है।

गुजरी महल स्वयं 15वीं सदी का भवन है। ग्वालियर जिला प्रशासन के विवरण में इसके पुरातत्व संग्रह में पहली शताब्दी ईस्वी तक की पुरावस्तुओं का उल्लेख है। महल के भीतर एक इमारत के इतिहास के साथ उससे कई सदियां पुराना मध्यप्रदेश भी मिलता है।

मुख्य बातें

  • प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर से बनी है।
  • मूल स्थान विदिशा जिले का ग्यारसपुर है।
  • पुरावशेष सूची में परमार शैली और आरंभिक मध्यकाल दर्ज हैं।

स्रोत और संदर्भ

  1. राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन · Shal bhanjika Nymph — PM-GMG-MP-1361134 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. जिला ग्वालियर, मध्यप्रदेश शासन · The Fort — Gujari Mahal collection ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. जिला ग्वालियर, मध्यप्रदेश शासन · Gujari Mahal Archaeological Museum ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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